क़िब्ला-ओ-काबा-ए-ईमान रसूल-ए-अरबी / Qibla-o-Kaba-e-Iman Rasool-e-Arabi
क़िब्ला-ओ-का'बा-ए-ईमान, रसूल-ए-'अरबी ! दो जहाँ आप पे क़ुर्बान, रसूल-ए-'अरबी ! चाँद हो तुम जो रसूलान-ए-सलफ़ तारे हैं सब नबी दिल हैं तो तुम जान, रसूल-ए-'अरबी ! सदक़ा हसनैन का रौज़े पे बुला लो मुझ को हिन्द में हूँ मैं परेशान, रसूल-ए-'अरबी ! किस की मुश्किल में तेरी ज़ात न आड़े आई तेरा किस पर नहीं एहसान, रसूल-ए-'अरबी ! कोई बेहतर है तो बेहतर से भी बेहतर तू है सब से आ'ला है तेरी शान, रसूल-ए-'अरबी ! कोई बेहतर है तो बेहतर से भी बेहतर तुम हो सब से आ'ला है तेरी शान, रसूल-ए-'अरबी ! तेरा दीदार है दीदार-ए-इलाही मुझ को तेरी उल्फ़त मेरा ईमान, रसूल-ए-'अरबी ! मज्मा'-ए-हश्र में इस शान से आए बेदम हाथ में हो तेरा दामान, रसूल-ए-'अरबी ! तेरा ही 'इश्क़ है ईमान, रसूल-ए-'अरबी ! बल्कि ईमान की है जान, रसूल-ए-'अरबी ! किस को हासिल तेरा इरफ़ान, रसूल-ए-'अरबी ! वस्फ़ जब करता है रहमान, रसूल-ए-'अरबी ! क़ुदसियों ने रुख़-ए-ज़ेबा का तसद्दुक़ पाया 'अर्श पर जब हुए मेहमान, रसूल-ए-'अरबी ! अर्ज़-ए-तयबा से चली झूम के जब बाद-ए-नसीम ...